मैं रेत हूं
घुल जाऊं तो कांच हूं टकराऊं तो चट्टान रिसता रहूं तो समय हूं रिस जाऊ तो काल मैं रेत हूं समय बदल देता हूं …………. नहर, नदी, झील, सागर से भी नहीं बुझती प्यास मेरी नदी की कोख से निकल कर भी प्यासा हूं मैं रेत हूं मैं सिर्फ अश्क पीता हूं मुझमें तुम अपनी … Read more